यूँ तो सबकुछ लूट गया है

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मुक्तक (बहर 212*4)

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हर घड़ी वो प्रिये याद आता रहा,
याद में मैं प्रणय गीत गाता रहा,
कल्पना के कलम से उकेरा उसे,
प्रेम के गीत उसको सुनाता रहा।
© देवेन्दु ‘देव’.

‘नमन’

सुंदर धरा पावन पवन
इस देश को मेरा नमन
जिन वीरों ने त्यागे जीवन
उन वीरों को मेरा नमन
कामों में जो हैं मगन
मजदूरों को मेरा नमन
फसलों का जो करें सृजन
किसानों को मेरा नमन
चारों ओर जिसने बांटे अमन
महापुरूषों को मेरा नमन
इस देश में मेरा जनम
इस देश को मेरा नमन
सुंदर धरा पावन पवन
इस देश को मेरा नमन
इस देश को मेरा नमन ||
– देवेन्दु ‘देव’.

– देवेन्दु ‘देव’

परिचय

नमस्कार मित्रों ! मैं देवेन्दु हूँ, मैंने ये ब्लॉग आप सबों के साथ अपनी कविताएँ साझा करने के लिए बनाया है | बचपन से मेरी रूचि हिन्दी और हिन्दी साहित्य में रही है जिसका अच्छा खासा प्रभाव मुझपर पड़ा है, फलस्वरूप मैं भी बचपन से ही कविताएँ लिखने लगा | आप मेरी कविताएँ मेरे फेसबुक पेज पर भी पढ़ सकते हैं जिसका लिंक है:
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